बिजली बोर्ड ने नकारा जीआईसी का दावा

पालमपुर (कांगड़ा)। दरंग गांव की पहाड़ियों में लावे के रूप में निकले पदार्थ के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीआईसी) की टीम ने बिजली के करंट को वजह बताया था। इसके बाद बिजली बोर्ड ने भी अपने खंभे के धरातल की जांच की। इसमें बिजली के खंभे से प्रवाहित होने वाले करंट की बात को नकार दिया है।
बिजली बोर्ड ने टीम की इस बात को उसी समय मानने से इनकार कर दिया था। चंडीगढ़ से आई जीआईसी की टीम ने इस पदार्थ को लेकर साफ कहा था कि यह पदार्थ लावा नहीं है। वहां मौजूद 33 केवीए बिजली लाइन के खंभे से होकर बारिश के दिनों में नीचे बहने वाला पानी रिचार्ज होता है। करंट से चट्टानें पिघलने से यह पदार्थ निकला है।
राज्य भू-वैज्ञानिक ने इसे मेगमैटिक एक्टिविटी (लावा) कहा था। बिजली बोर्ड के गले यह बात नहीं उतरी थी। बिजली बोर्ड ने इस 33 केवीए लाइन के खंभे के धरातल की जांच करवाई। इसमें पानी के रिचार्ज होने की कोई बात सामने नहीं आई है।
अब इस पदार्थ का रहस्य और गहरा गया है। सूत्रों के अनुसार बिजली के खंभे के नीचे एक तरफ एक बड़ा छेद बना है। इससे कुछ तरल पदार्थ जैसा निकला है। बिजली बोर्ड के एसडीओ एसके सोनी ने कहा कि बिजली बोर्ड ने खंभे की जांच की है उसके नीचे करंट से उत्पन्न होने वाले पदार्थ की कोई बात सामने नहीं आई है। वहीं, दरंग पंचायत के प्रधान वेद प्रकाश ने कहा कि अभी तक वहां पर कोई एक्टिविटी नहीं हुई है।

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